21 जून 2023 - 10:43
अमरीका ने मोदी को अब तक स्टेट विज़िट के लिए आमंत्रित क्यों नहीं किया था और अब क्यों किया है?

यह पहली बार नहीं है, जब भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका की यात्रा कर रहे हों, वह इससे पहले भी कई बार अमरीका जा चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है कि जब वह प्रधान मंत्री बनने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर इस देश की यात्रा कर रहे हैं।

मोदी के मानवाधिकार रिकार्ड को लेकर अमरीका हमेशा पसोपेश में रहा है। क्योंकि अगर वह खुली बांहों से मोदी का स्वागत करता है, तो मानवाधिकारों के उसके दावों की पोल खुल जाएगी, लेकिन चीन के मुक़ाबले के लिए उसे भारत को मोहरे को तौर पर इस्तेमाल करने की भी ज़रूरत है।

इसलिए अब व्हाइट हाउस ने इस दुविधा से निकलकर अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए पहली बार मोदी को स्टेट विज़िट के लिए निमंत्रण दिया है और उनके लिए रेड कार्पेट बिछाई है।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ी से बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में अमरीका अब यह बात अच्छी तरह से समझ गया है कि वह अकेले अपने दम पर चीन का रास्ता नहीं रोक सकता, इसलिए उसे चीन के पड़ोसी देशों और ख़ास तौर पर भारत को अपने पाले में करना पड़ेगा।

इसीलिए उसने मोदी सरकार के रहते हुए भी भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और उसे सम्मान देने का दिखावा किया है। निश्चित रूप से अमरीका, भारत को चीन के सामने लाकर खड़ा करना चाहेगा, ताकि दोनों पड़ोसी देशों की लड़ाई से उसे सीधा लाभ पहुंचे।

हालांकि मंगलवार को अमरीका की यात्रा पर निकलने से ठीक पहले मोदी ने ट्वीट कियाः हम व्यापार, वाणिज्य, नवाचार, प्रौद्योगिकी और ऐसे दूसरे क्षेत्रों में भारत-यूएसए संबंधों को मज़बूत बनाना चाहते हैं।

मोदी सरकार ने भारतीय प्रधान मंत्री की इस यात्रा को ऐतिहासिक क़रार दिया है, जबकि एक हिंदू दक्षिणपंथी नेता के नेतृत्व में भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे सुलूक, मणीपुर में जारी हिंसा और बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।

लेकिन अब अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी स्पष्ट कर दिया कि आने वाले अगले कुछ वर्षों में अमरीका को कई वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों पर भारत के साथ की सख़्त ज़रूरत है।

हालांकि अमरीका में मानवाधिकार संगठनों ने मोदी की अमरीका की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा का खुलकर विरोध करने का एलान किया है। ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया की डायरेक्टर इलेनी पीयरसन ने बाइडन से मांग की है कि मोदी के सामने भारत के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को उठाने में वह झिझक नहीं दिखाएं।

उनके संगठन ने मंगलवार को वाशिंगटन में 2002 के गुजरात साम्प्रदायिक दंगों में मोदी की भूमिका पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन का एलान किया है, जिसे मोदी सरकार ने भारत में बैन कर दिया था।

गुजरात दंगों में पूर्व योजना के अनुसार, हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों ने मुसलमानों का जनसंहार किया था और सरकार ने उनके साथ सहयोग किया था। इन दंगों में 3000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। msm

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